Edible Oils: सरसों के तेल का भाव गिरा, रिफाइंड भी आया नीचे, अभी और कम हो सकते हैं दाम

 


कोरोना काल में चौंकाने वाली खबर है। आगरा समेत आसपास जनपदोंं के बाजार में सरसों तेल का भाव पांच रुपये गिरा है। रिफाइंड ऑयल का भाव भी नीचे आया है। कारोबारी इसकी खास वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि सोमवार को नई दिल्ली में अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ की बैठक के बाद यह मंदी आई है। सरसों तेल ही नही सरसोंं के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है।


आगरा के कारोबारी दिनेश गोयल व पुनीत की मानेंं तो पिछले चार माह से सरसो के तेल व रिफाइंड तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं। अगर ब्रांड की बात करें तो सरसों और रिफाइंड तेल 170 रुपये लीटर से लेकर 200 रुपये और उससे भी ज्यादा दाम पर बिक रहा है। ऐसे मेे सोमवार को नई दिल्ली मे अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ ने बैठक के बाद केन्द्र सरकार से अपील की है कि वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीबों को अत्यधिक रियायती दर पर खाद्य तेल उपलब्ध करा सकती है। यही नहीं सरसों के तेल को जीएसटी मुक्त करने की भी मांग की गई है। उम्मीद है कि सरकार इस पर ध्यान देगी।बहरहाल, इसी बैठक का असर है कि अब तक 170 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रहे सरसोंं के तेल मे चार रुपये से लेकर दस रूपये तक की गिरावट दर्ज की गई। खेरागढ मे कागारौल रोड स्थित मंडी व किरावली मंडी में 6800 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय मंगलवार को 6600 रुपये प्रति क्विंटल तक सरसों की नीलामी लगी।


जमाखोरी पर नहींं लग पा रहा विराम


सरसों या सरसोंं के तेल के दाम बढ़ने के पीछे बडी वजह जमाखोरी माना जा रहा है। इस कारोबार से जुडे लोगों की मानेंं तो खेरागढ मे कागारौल रोड स्थित मंडी व किरावली मंडी के आसपास ही बडी मात्रा मे सरसों की जमाखोरी की गई है। यह खेल इन दोनों स्थानोंं के साथ-साथ जिले में एक दर्जन स्थानों पर और चल रहा है। ऐसे ही खेल सरसोंं के तेल में है।आगरा में 66 हजार हेक्टेयर में सरसों का उत्पादन होता है पर मांग अधिक होने के कारण यहां की प्रमुख खेरागढ मेंं कागारौल रोड स्थित मंडी व किरावली मंडी में हरियाणा व राजस्थान से बडी मात्रा में सरसों की आवक होती है। रोज करीब 500 टन सरसों का तेल उत्पादन करने वाली आगरा आयल मिल, बीपी आयल मिल, शारदा आयल मिल व महेश आयल मिल सीधे हरियाणा व राजस्थान मंडी से सरसों क्रय करते हैं। जनपद में छह और आयल मिल के अलावा 200 से अधिक स्प्रेलर हैंं, जिनके द्वारा रोज करीब 100 टन तेल का उत्पादन किया जाता है।खेरागढ मेंं कागारौल स्थित मंडी व किरावली मंडी में रोज करीब दो हजार क्विंटल सरसों की आवक होती है। सरसों खरीदने का क्रय केंद्र नहीं है। इसलिए इसका समर्थन मूल्य भी नहीं है। जो फसल आती है, उसे नीलामी से बेचते हैं। किरावली में सरसों की लैब में जांच होती है। तेल के आधार पर उस सरसों के दाम निर्धारित होते है। मंगलवार को इन मंडियों में 6600 रुपये क्विंटल तक सरसों की नीलामी लगी, जो एक महीना पहले यानी 25 अप्रैल को 3900 रुपये में बिकी। एक महीने में ही सरसोंं के दाम मे करीब 2700 रुपये प्रति क्विंटल की बढोत्तरी हुई है। इस पर जीएसटी और मंडी शुल्क अलग से लगता है। यही वजह है कि सरसों की आवक मंडी में कम हो रही है। क्योंकि किसानों से व्यापारियों ने सीधे फसल खरीदना प्रारंभ कर दिया है। यहां मंडी शुल्क से 100-200 सौ रुपये अधिक देकर फसल खरीदी जाती है तो जीएसटी और मंडी शुल्क बच जाता है। कुल मिलाकर कुछ व्यापारियों ने फसल की जमाखोरी कर ली तो बाजार में सरसों पहुंच नहीं रही है। कम फसल आवक के चलते सरसों का तेल महंगी बिक रही है।


ये है तेल का खेल


एक कारोबारी ने बताया कि मंडियों में 6600 से लेकर 6900 रुपये क्विंटल के हिसाब से सरसों की फसल बिक रही है। इस पर छह प्रतिशत जीएसटी और एक प्रतिशत मंडी शुल्क अलग से लगता है। अगर एक क्विंटल सरसों की फसल का तेल निकाला जाए तो 33 किलो तेल निकलता है। दो किलो खल जल जाती है। ऐसे में 65 किलो खल बचती है। थोक के रेट में 165 रुपये किलो तेल बिक रहा है। इस हिसाब से 33 किलो तेल की कीमत 5445 रुपये बनती है। वहीं 65 किलो खल 30 रुपये किलो के हिसाब से 1950 रुपये का बिक रहा है। पेराई 250 रुपये क्विंटल है। जबकि लोडिंग-अनलोडिंग में पांच रुपये किलो का चार्ज लग जाता है। ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग से है। यही वजह है कि बाजार में सरसों का तेल महंगा बिक रहा है।

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