UPSC की तैयारी छोड़ चाय बेचना शुरू किए, आज करीब 200 आउटलेट्स से हर दिन का टर्नओवर 30 लाख तक है: Chai Sutta Bar
अच्छी और कड़क चाय हर किसी को पसंद होती है। लेकिन रोजाना चाय पीने वाले लोग चाय के दूसरे फायदों और इस्तेमाल से शायद अनजान होते हैं। आज के समय में चाय की आदत लगभग हर किसी को है। इसके बावजूद भी चाय बेचने वाले को लोग सबसे छोटे बिजनेस मैन के रूप में देखते हैं। आज हम बात करेंगे, एक ऐसे शख्स की जिन्होने यूपीएससी की तैयारी के साथ ही साथ कुलहर मे चाय बेचने का कारोबार शुरू कर दिया।
कौन है वह शख्स
यूपीएससी के छात्र रहे अनुभव दुबे (Anubhav Dubey) एक व्यवसायी के लड़के हैं। उन्होंने मात्र 22 साल की उम्र में यूपीएससी की तैयारी करने के साथ ही साथ चाय का बिजनेस शुरू करने का मन बनाया। चाय के कारोबार के बारे में अनुभव दुबे का तर्क है कि चाय एक पोटेंशियल प्रोडक्ट है, इस बात को समझकर मैंने इस बिजनेस को शुरू किया।
कैसे की शुरुआत
वर्ष 2016 का समय था, जब अनुभव दुबे यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच उनके मन में एक ऐसा विचार आया कि चाय तथा कॉफी एक पोटेंशियल प्रोडक्ट है और उन्होंने इस बात का अपने मन में गहन विश्लेषण किया। अनुभव दुबे के पिता एक बिजनेसमैन है और वह अपने बच्चों को बिजनेस में नहीं आने देना चाहते हैं। उनका कारण है कि बिजनेस में बहुत मथापची है इसलिए इससे अच्छा रहेगा की बाल-बच्चे अच्छे से पढ़ लिखकर कोई अच्छे प्रतिष्ठित नौकरी लेने में कामयाब हो जाए। पिता के मन के अनुकूल काम न होने के कारण अनुभव दुबे ने अपने पिता को अपने चाय के कारोबार के बारे में पहले भनक तक नहीं लगने दी। बाद में फेसबुक तथा सोशल मीडिया पर अपने बेटे के कुलहर चाय के कारोबार के बारे में अनुभव (Anubhav) के पिता ने देखा तो उन्हें इस बात का पता चल गया। अपने चाय के कारोबार के शुरुआत के बारे में बात करते हुए अनुभव बताते हैं कि, उन्होंने सबसे पहले अपने चाय कारोबार की शुरुआत इंदौर (Indaur) में की थी। शुरू में उनके पास पैसा नहीं था, लेकिन उस समय उनके दोस्त आनंद नायक (Anand Nayak) जो कि पहले से ही बिजनेस मैन थे, इसीलिए उनके पास ₹300000 थे। उसी पैसे से उन लोगों ने अपना कारोबार शुरू किया। शुरुआत में वह सारे पैसे अपने दुकान के अंदरूनी मेंटेनेंस में लगाए। बाद में उनके पास बैनर लगाने तक के भी पैसे नहीं बचे हैं, इसके बावजूद भी वे लोग कुल्हड़ में बार (BAR) टेबल पर चाय बेचने का काम शुरू किये। वे लोग अपने चाय दुकान का नाम “चाय सुट्टा बार” (CHAI SUTTA BAR) रखें।
अनुभव बताते है कि,” मैंने इस चाय सुट्टा बार को गर्ल हॉस्टल के सामने खोला, क्योंकि मुझे सबसे पहले अपने बार पर भीड़ इक्कठा करनी थी। मेरा मानना था कि जहां लड़कियों की भीड़ आएगी, वहां लड़के की भीड़ बढ़ेंगी ही।” फिर चाय सुट्टा बार की प्रचार इनके सभी दोस्तों ने मिलकर की। अनुभव बताते है कि, “मेरे दोस्तों ने मेरी बहुत मदद की। लोगों तक बार की पहचान दिलाने में मेरे दोस्तों ने बहुत मदद की। 5 या 10 फ्रेंड एक जगह इकठ्ठा होकर जोर-जोर से चाय सुट्टा बार की तारीफ करते। फिर लोगों तक इस बार की नाम पहुंच जाती थी।” शुरुआत में वे लोग हार्डवेयर का कुछ सामान अपने दोस्त की दुकान से उधार लिए, दुकान चलने के बाद वे लोग उधारी का पैसा भी चुका दिए। कारोबार अच्छे चलने और उसके विस्तार के साथ ही साथ अनुभव दुबे ने यूपीएससी की तैयारी छोड़ दी। बाद में “CHAI SUTTA BAR” का कारोबार इतना चलने





Comments
Post a Comment